अध्याय 26 : फटती इच्छाशक्ति

इस पल, भूख से भरा होंग हाओचेंग मंत्रमुग्ध-सा देखता रह गया, मानो अद्वितीय कलात्मक ख़ज़ाना देख रहा हो, उन रेखाओं से बनी दुनिया, इतनी ख़ूबसूरत, इतनी जटिल, मानो सचमुच कभी अस्तित्व में रही हो।

फिर बेक़ाबू ग़ुस्सा आया।

ख़ुद ने सामने अपनी तरफ़ मुस्कराती अप्सरा के लिए, ऐसा भयानक ख़याल पैदा कर लिया!

लेकिन अपनी तरफ़ बढ़ी वह गोरी बाँह और कस कर पकड़ बन गई, उसका हाथ मानो अपने शरीर के अंदर घुस कर, अनगिनत रेखाएँ बन कर कुछ ढूँढ रहा था।

एक नीले तेंदुए जैसे शरीर की रूपरेखा अचानक होंग हाओचेंग के शरीर की त्वचा से उभर आई, मानो सामने वाली ने उकसा कर बाहर निकाल दिया हो।

[गरज, स्वादिष्ट भोजन!]

होश में होंग हाओचेंग बेबस हो कर अपना मुँह खुलता देख रहा था, मानो सामने की औरत की आकृति को काट खाने को।

और वह मुस्कराहट लिए, ज़रा भी बचने का इरादा नहीं रखती थी।

«नहीं!»

अपना मुँह इतना खुला कि एक सिर समा जाए, ख़ुद ने अपनी आँखों से तेंदुए जैसे मुँह को इस अद्वितीय सुंदर सिर पर लगते देखा।

एक कौर, मुँह में भर लिया।

[नहीं!]

अपने शरीर पर क़ाबू न पा सकने वाला होंग हाओचेंग असीम ग़ुस्से से भर गया, लेकिन उसे लगा कि उसकी इच्छाशक्ति कस कर जकड़ी गई है, हिल नहीं सकती।

चीरना-फाड़ना!

नफ़रत और हिंसा शरीर के हर कोशिका में फैल गई।

[तुमने बचने की कोशिश क्यों नहीं की!]

{यह… मेरे जीवन का… सब प्रक्षेप-पथ है…}

[नहीं, हट, हैवान!]

{कृपया ले जाना… मेरा… अतीत…}

ज़मीन पर, अनगिनत लोग सिर उठा कर देख रहे थे।

{…नए की ओर…}

ज़मीन पर, एक भवन के अंदर।

राजा के हाथ में एक फल था, उसने अचानक जैसे कुछ महसूस किया, भवन की छत की तरफ़ देखा।

«वह क्या है? देवता?»

उसके नीचे बाएँ-दाएँ सिविल और सैन्य अधिकारी एक साथ आसमान की तरफ़ देखने लगे।

एक पीठ पर सुनहरी तलवार लटकाए तेजस्वी आकृति नीचे के खाने की मेज़ के पीछे से निकली, उसकी हैरान और गहरी नज़र भवन को भेदती हुई-सी थी।

«दुनिया के सबसे ताक़तवर भाड़े के सैनिक के तौर पर, मैंने अब तक इतनी शक्तिशाली हस्ती नहीं देखी, हालाँकि, वह शायद… वह क्या कर रही है?»

तलवार वाले आदमी ने सिर घुमाया, उसके पीछे खाने की मेज़ के पास, वह हमेशा हल्की मुस्कान वाली कोमल औरत, इस वक़्त उलझन में थी।

और, उसकी आकृति धुँधली हो रही थी।

राजा ने तलवार वाले आदमी की गंभीर नज़रों के साथ देखा :

«शू जी, दुनिया के नंबर एक भाड़े के दल की लेखा-अधिकारी के तौर पर, तुम सब ग्रंथ-पुराण जानती हो, क्या कभी ऐसी हस्तियों की कहानियाँ पढ़ी हैं?»

धुँधली होती आकृति वाली औरत ने राजा से माफ़ी माँगी, सुनहरी तलवार वाले की तरफ़ देखा : «कप्तान।»

«हँ?»

«दरअसल, तुम लोग बहुत पहले मर चुके हो।»

शोर से, भवन के सिविल और सैन्य अधिकारी सब हैरत से उठ खड़े हुए, राजा ने हुँकार कर हाथ का सुनहरी प्याला ज़मीन पर पटक दिया।

«बेअदबी!»

औरत का शरीर हिला, चारों ओर की दुनिया भी एक साथ हिल गई।

सब खड़े रह न सके, वह योद्धा अचानक जैसे कुछ सोच कर, हैरत से औरत को देखने लगा।

«यह जगह… प्राचीन भविष्यवाणी के स्क्रॉल में दर्ज, दिव्य प्रकाश प्रार्थनाकर्ता द्वारा निर्मित… आत्मिक पवित्र-स्थली?!»

शू जी मुस्कराई, सादा-सुंदर मुस्कान दिखाई।

«हाँ, दरअसल, यह मेरे मन के सागर में है। मैं सबको ले कर, अनगिनत काल गुज़ार चुकी हूँ। लेकिन, बस यात्रा करना, हमेशा यात्री ही रहना है। मैं थक गई, मुझे एक घर चाहिए।»

आस-पास बहुत से लोग शोर से आवाज़ें निकालने लगे, लेकिन इस पल सब बंद हो गया।

तलवार वाले आदमी ने अपने शरीर को देखा, फिर आसमान में उल्का-सी गुज़रती आकृति को।

«वह…?»

उसने सामने के कप्तान को देखा : «वह बहुत अच्छा है, उसने आत्मा निगल कर सामने वाले की रक्त-वंशावली को समा सकने वाली प्राचीन रक्त-वंशावली जगा ली। वह रक्त-वंशावली, जिसके बारे में मैंने भी प्राचीन ग्रंथों में बस टुकड़े-टुकड़े जानकारी पाई थी। उसे मिली रक्त-वंशावली के साथ, शायद, वह अनगिनत और यात्रियों के लिए, उन सबको समा सकने वाली एक ‘घर’ नाम की जगह बना सके। यही है मेरा चुना हुआ पति। कप्तान, तुम उसे मंज़ूर करते हो?»

कप्तान का चेहरा शांत होता गया।

«शू फ़ेई, तुम जो कह रही हो, रक्त-वंशावली वग़ैरह, मैं तो समझ ही नहीं पाया। तुम्हारा यह ख़ाविंद कहाँ से आया?»

«धरती नाम की एक दुनिया से।»

कप्तान ने सिर हिलाया, फिर इस आदमी ने पाया, उसका हाथ जर्जर हो रहा था, जैसे कहीं-कहीं से ग़ायब हो गया हो।

उसने फिर भवन की तरफ़ देखा, भवन टूट रहा था, चारों ओर पल भर में पुराना हो गया, तेज़ी से खंडहर हो गया।

«तो मैं कब का मर चुका हूँ। शू जी, तुम कप्तान मुझसे भी कहीं ज़्यादा ताक़तवर हो गई हो, दिव्य प्रकाश तक बन गई हो। तुमने ज़रूर काफ़ी लंबा अरसा गुज़ारा होगा, शुक्रिया, हमारी चेतना को अब तक जारी रहने दिया।»

आसमान से गिरता होंग हाओचेंग ख़ुद को तेंदुए-से मुँह में तब्दील हो कर, इस गले लगी ख़ूबसूरत आकृति को एक-एक कौर चीरता-फाड़ता और निगलता देख रहा था, वे अनगिनत जटिल रेखाएँ बन कर अपने में समा रही थीं।

«स्वादिष्ट… कितनी ख़ूबसूरत!»

अपने गले से पागल कर देने वाली आवाज़ निकली, उसकी नफ़रत चरम पर पहुँच गई।

होंग हाओचेंग हैरत और टूटे दिल से यह सब देख रहा था।

इस बार जब वह होश में यह सब देख सका, तो धुँधली-सी कुछ अविश्वसनीय जानकारी अपने मन में तेज़ी से दाख़िल होती महसूस हुई, लेकिन पल भर में भूल भी गया।

[शू जी, तुम्हारा नाम है!]

[शू जी! मेरी बीवी का नाम, आआआआह!]

ख़ुद को आख़िर उसका नाम पता चल गया।

ज़मीन हिल गई।

होंग हाओचेंग की एक बाँह काँपती हुई उठी, उसका तेंदुए जैसा सिर ठिठका, इस बाँह को देखा।

«वह कमज़ोर रक्त-वंशावली ने ज़ाहिर तौर पर मेरी रक्त-वंशावली की ऊर्जा को बेअसर कर दिया था, तुम अब भी अपने शरीर पर क़ाबू क्यों कर सकते हो।»

[हट, उसे मत खा, हट जा!]

«हुँह।»

मुँह ने तिरस्कार भरी हँसी दिखा कर, उस सुंदर कंधे पर एक कौर मारा।

उसका शरीर स्वाभाविक रूप से ऊर्जा और प्रक्षेप-पथ की रेखाओं में बदल कर, अपने शरीर में समा गया।

«तुमने फिर 133473.2 किमी नौका-यात्रा रेखांकित रेखाएँ पाईं, यह औरत सचमुच काफ़ी जगहें घूमी है। यह उसकी अपनी मर्ज़ी है, तुम्हें नहीं चाहिए?»

[वा उईईई आआआह!]

दूसरा हाथ भी काँपता हुआ उठा, कस कर चिपकी आकृति को धकेल कर दूर करना चाहता था, लेकिन नाकाम रहा।

हाथ की ताक़त बहुत कम थी, और शू जी बहुत कस कर चिपकी थी।

ख़ुद दिल में चीख़ने के अलावा, कुछ नहीं कर सकता था।

ख़ुद क्यों कुछ नहीं कर सकता।

क्या मैंने कोई ऐसी चीज़ नहीं जगाई जो इस राक्षस से भी ताक़तवर हो?

पहाड़ ढह गए, रोशनी अस्त-व्यस्त हो गई। आसमान में रेत-धूल उड़ने लगी, आँधी और घना कोहरा भर गया।

कोमल घुमावदार, लेकिन सिर गँवा चुकी आकृति को ये दोनों हाथ लगातार बाहर धकेलते देख, ख़ुद का राक्षसी सिर फिर अजीब भाव दिखाने लगा।

«भले ही मैं तुम्हारी दुनिया में आने से पहले ही पैदा हुआ, और यह रेखांकित रक्त-वंशावली दी गई, लेकिन मैं कोई आम इंसान नहीं जिसका विरोध कर सको। कमज़ोर भेड़िया भी भेड़िया होता है, ताक़तवर मुर्ग़ भी मुर्ग़ ही। तुम शायद थोड़े ख़ास हो, लेकिन बस दूसरों को थोड़ा परेशान कर सकते हो।»

[मैंने कहा हट जा, मैंने कहा मर जा!]

[मैं तुझे ज़रूर मारूँगा, मैं ख़ुदकुशी करूँगा, ज्वालामुखी में कूद जाऊँगा! मैं तुझे समुद्र की तह में डुबो दूँगा! मैं तुझे इस्पाती पहिए में डाल कर कीमा बना दूँगा!]

{मत करो…}

एक कमज़ोर आवाज़ आई।

[शू बहन?! तुम अभी मरी नहीं, जल्दी विरोध करो, इसे मारो! तुम इतनी ताक़तवर हो, जल्दी करो!]

{रेखांकित रक्त-वंशावली, वह भी प्राचीन आत्मा-भवन से पैदा हुई रक्त-वंशावली है, लेकिन वह आत्मा-भवन पुरानी दुनिया का नहीं है। तुम खोई आत्मा-भवन की सिर्फ़ एक ही घेरे की रक्त-वंशावली पा सके, वह भी दैवीय संयोग है।}

«देखो, मैंने कहा था वह अपनी मर्ज़ी से है। मुझे मारोगे? हुँह, अब से मैं ही तुम हूँ, कैसे मारोगे।»

[इसे मारो!]

होंग हाओचेंग असीम ग़ुस्से में था, छाती पर रोशनी का घेरा धुँधली-सी चमक रहा था।

{उसकी आत्मा तुम्हारे शरीर की प्राचीन रक्त-वंशावली ने पकड़ ली है, बस रक्त-वंशावली की ताक़त इतनी कमज़ोर है कि अब भी उसकी अपनी चेतना बाक़ी है।}

{लेकिन जैसे-जैसे तुम्हारे चलने की जगहें विशाल होती जाएँगी, प्रक्षेप-पथ उसकी यात्रा से आगे निकल जाएगा, तो धीरे-धीरे उसकी आत्मा की ऊर्जा तुममें समा जाएगी। तब, पति, तुम चाहे उनके घोंसलों में दाख़िल हो जाओ, कोई रोकने वाला नहीं होगा।}

होंग हाओचेंग के उगे नीले-चेहरे तेंदुए के मुँह से, तेज़ी से दो लंबे नुकीले दाँत निकल आए।

उसकी आँखों में ठंडी चमक आई और औरत के बिना सिर के मानसिक बल शरीर को देखा।

«यही है तुम्हारी योजना, हुँह… कोई अचरज नहीं। यह सचमुच एक अच्छी योजना है, इस शरीर के ज़रिए हमारे घोंसलों में घुसना, कितने लोगों का सपना होता है। अफ़सोस, तुम कामयाब नहीं होगे।»

{होंगे।}

आसमान में, उलटी गिरती औरत होंग हाओचेंग को थामे, उल्का-सी सीधी ज़मीन पर गिर रही थी।

उलटा लटका तेंदुए का बड़ा मुँह खुला, उसके शरीर की तरफ़ एक कौर मारने को।

«मर जाओ, ज़हरीली औरत!»

[मर जाओ, हैवान! तेरी पूरी नस्ल मिटा दूँगा!]

धम! दोनों हथेलियाँ एक ऊपर एक नीचे से इस बड़े मुँह के ऊपरी और निचले जबड़े को पकड़ बैठीं।

औरत के कंधे तक पहुँचा तेंदुए का सिर-इंसानी चेहरा, हैरत में आ गया।

«क, क्या?!»

औरत का आधा-अधूरा शरीर फैलती मानसिक ऊर्जा से चमका, सहज रूप से ग़ायब हुए हिस्सों की मरम्मत करने लगा, हालाँकि शरीर इसके साथ कुछ और पारदर्शी हो गया।

धीरे-धीरे उभरता ख़ूबसूरत सिर हैरत से पास ही हाँफते बड़े मुँह को देख रहा था।

वह उसके अपने दोनों हाथों से, ऊपरी-निचले जबड़े कस कर रोके गए थे!

{यह तो पूरी तरह जागा हुआ दो-घेरा सात-स्तर का रेखांकित रक्त-वंशावली का राक्षस है!}

[उआआआह!]

नौजवान की बाँहों में माँसपेशियाँ उभर आईं, नौजवान की हथेली की उँगलियों के पोरों से सुनहरे बारीक शल्क उग आए। होंग हाओचेंग के गले से दहाड़ निकली!

[उ अओ ओ ओ!]

अचानक, आत्मा की कँपकँपी गले की वाक्-रज्जु से फूट पड़ी!

«उआआआआआह!»

[रुको, तुम कैसे…]

तेंदुए की आँखों ने देखा दोनों हाथ इसके मुँह को और ज़्यादा फैला रहे हैं!

होंठ तन गए, फट कर दरार पड़ गई, आत्मा का माया-रक्त लगातार रिसने लगा।

«मैं ही रक्त-वंशावली हूँ, रक्त-वंशावली ही मैं, चाहे वह कुछ भी हो, मैं ही इस शरीर का! मालिक हूँ!»

चटाख! चीर!

«हट!»

दोनों बाँहें अज़दहे की तरह माँसपेशियाँ फुलाए, रक्त-वाहिकाएँ उभर कर आत्मा का मायावी रक्त बिखेर रही थीं।

धम!

ज़बरदस्त ताक़त ने इस मुँह को धम से चीर कर तोड़ डाला!

निगली गई अनगिनत रेखाएँ और ऊर्जा टूटे पाइप के पानी की तरह फूट कर बाहर निकल पड़ीं।

औरत की कोहरे-सी तैरती ख़ूबसूरत आँखें दंग रह कर इस कस कर चिपके बिना सिर के आदमी को देख रही थीं।

उसके शरीर की त्वचा के नीचे, तेंदुए-सी आकृति बाएँ-दाएँ टकरा रही थी, लेकिन इस इंसानी सीमा तोड़ती इच्छाशक्ति ने कस कर दबा रखा था।

{यह कैसे, मुमकिन…}

गर्दन के ज़ख़्म से «माँस-रक्त» टेढ़ा हो कर नया जंगली-ख़ूबसूरत सिर उग आया।

«हुँह, हा… छोटी बहन, तुम अभी कितनी जगहें घूमी हो।»

होंग हाओचेंग की जंगली आँखें सामने की औरत पर जमी थीं।

«तुमने अभी कितनी दुनियाएँ देखी हैं, जो ऐसे ही दूसरों का भविष्य तय कर दो!»

अनगिनत माँस-रक्त और प्रक्षेप-पथ की रेखाएँ पास बिखर गईं, आसमान और ज़मीन पर गिरती रहीं, हिलते पहाड़-नदियों को स्थिर कर दिया।

«तुम्हें मेरी बात मान कर चुपचाप रहना होगा।»

बहुत कमज़ोर औरत ने हल्की मुस्कान दिखाई।

{हाँ।}

उसने एक हाथ से इस गोरी आधी-पारदर्शी औरत की ठुड्डी कस कर पकड़ी, फिर होंठ उससे चिपका दिए।

«आगे से अपनी मर्ज़ी से फ़ैसले मत करना।»

«मैं तुमसे ज़्यादा दूर, ज़्यादा लंबी, ज़्यादा घुमावदार, और ज़्यादा मज़बूती से चलूँगा।»

{हाँ।}

शू फ़ेई की नाक से हल्की-सी हाँ-हाँ की आवाज़ आई।

धड़ाम! दोनों ज़मीन पर गिरे, बड़ा गड्ढा बन गया।

गड्ढे की तह में लेटी दो नज़रें एक-दूसरे से मिलीं, बहुत पारदर्शी हुई शू जी ने शर्मा कर आदमी की मज़बूत छाती में सिर छुपा लिया।

सुबह-सवेरे, होंग हाओचेंग जागा।

हवाई जहाज़ अब भी उड़ रहा था, इन दिनों उसे इस कभी न उतरने वाली उड़ान की आदत हो गई थी। तथाकथित हनीमून, बस लगातार तरह-तरह की सवारियाँ बदल कर रास्ता तय करना था, एक महीने में धरती का हर कोना नाप लेना चाहती थी जैसे।

पता नहीं उसे मार कर ख़त्म करना चाहिए या नहीं, तो सिक्का उछाल दिया, हाँ… सिक्के भाई की सलाह थी «नहीं»।