अध्याय 15 : अचानक बदलाव

विशाल भवन में कोयले की आग चटख रही थी, आग की रोशनी लोगों की ख़ुशमिज़ाज सूरतों पर पड़ रही थी।

«यह मेरा वादा किया हुआ सीधे इस्तेमाल होने वाला गुप्त कौशल है।» मेज़ के पास मो ली ने एक-एक कर परिचय दिया, «मुक्का-कला ‘हज़ार भुजा मुष्टि’, ‘चट्टान-विभाजक हथेली’, इलाज और शरीर को ताक़तवर बनाने वाली ‘काँच बोध’, और तत्व-प्रकार की तलवार-कला…»

आख़िरकार उन्हें पता चला कि काँच बोध क्या चीज़ है — यह तो स्वास्थ्य-लाभ प्रकार का गुप्त कौशल था! इसका लगभग मतलब था कि आज रात यहाँ मौजूद बहुत से लोगों के पास एक «अस्पताल» क्षमता आ गई।

जब मो ली ने ‘गहन रात्रि’ का परिचय दिया तो उनके दिमाग़ झट से पूरी तरह चौकन्ने हो गए।

ज्वाला तलवार-मार्ग और पाला तलवार-कला बेशक ताक़तवर थीं, लेकिन ‘गहन रात्रि’ के सामने वे फीकी पड़ गईं। यह तो वह मशहूर मानसिक-प्रकार की आक्रमण क्षमता थी जो यांग ज़िज़ांग इस्तेमाल कर सकता था!

«यही है ‘गहन रात्रि’?»

शू ऐयुआन ने यांग ज़िज़ांग के पास पड़ा एक अनुबंध-पत्र उठाया।

उसकी ख़ूबसूरत आँखों में दिव्य प्रकाश घूम रहा था।

«ज़िज़ांग साहब सचमुच उदार हैं, ऐसा ख़ज़ाना, कह दिया तो सबको दे डाला। मैं होती तो शायद दो-तीन ही निकाल कर कप्तानों में बाँटती।»

सब जानते थे उसने ग़लत नहीं कहा। दो-तीन निकालना भी मेहरबानी होती, कुछ लोग तो बस छूट पर बेचने का मौक़ा देते, और लोग फिर भी लपकते।

यांग ज़िज़ांग ने ग्लास पकड़ कर मुड़ा, हल्का सिर झुका कर शुक्रिया अदा किया कि इस लड़की ने सबके सामने जानबूझ कर उसकी तारीफ़ की।

तभी वह अचानक थोड़ा झूमा, फिर भवन की गुंबदनुमा छत की तरफ़ देखा, पत्थर की इस रचना पर लोहे के घेरे वाले मोमबत्ती-दान लटक रहे थे, लेकिन कब के बेकार पड़े थे।

क्या मुझे धोखा हुआ… यांग ज़िज़ांग ने हैरानी से सोचा, फिर अपने ग्लास को देखा।

अभी ग्लास में जलती मोमबत्ती का अक्स दिखा था?

«ज़िज़ांग भाई।» हर वक़्त यांग ज़िज़ांग पर नज़र रखने वाले बोबोली ने फ़ौरन चिंतित स्वर में पुकारा।

नशे में झूमते यांग ज़िज़ांग ने माफ़ी भरे अंदाज़ में सिर हिलाया।

«मैं ठीक हूँ, अभी भी होश में हूँ।»

«हाहाहा।»

धरती पर अक्सर सुनी जाने वाली यह ज़िद्दी बात सुन कर, लोग हँस पड़े, मो ली का वितरण देखते हुए दिल में उत्साह से कान खड़े कर लिए।

«…परिचय बढ़ने के साथ यह अनुभव से लगातार तेज़ी से जुड़ता जाएगा… शायद एक-दो महीने में ही सैकड़ों साल के गुप्त कौशल अनुभव पर पूरी महारत हासिल कर के महागुरु बन जाएँगे।»

पुष्टि सुनते ही सबने ठंडी साँस खींची।

«ज़बरदस्त, यह कैसे मुमकिन है?»

«दरअसल बस कुछ प्रतिशत पर महारत हासिल कर लेना ही पूरी महारत मानी जाती है। क्योंकि यह सैकड़ों साल का युद्ध-कला अनुभव है, साधक पहले से ही बहुत कुशल है।»

शू ऐयुआन चुपचाप यांग ज़िज़ांग के पास बैठी, बग़ल से मुस्कराती आँखों से नौजवान को मेज़ के दोनों छोर के लोगों को इस्तेमाल का तरीक़ा समझाते देखती रही।

सबने ललचाई नज़रों से एक-एक अनुबंध-पत्र थामे।

वाक़ई फ़्रीक्वेंसी-कट क्षेत्र में इतनी हलचल मचाने वाला शख़्स, सचमुच करामाती था, ऐसा तरीक़ा ढूँढ निकाला जिससे दशकों की गुप्त कलाएँ सीखी जा सकें, बस पता नहीं यह तरीक़ा मिल सकता है या नहीं।

मा बिन बावर्ची यांग ज़िज़ांग के तिरछे सामने बैठा था, उसने हाथ में ‘चट्टान-विभाजक हथेली’ वाला गुप्त कौशल लिया, फ़ौरन आँसू भरी आँखों से बेताबी से दबा कर सीख लिया।

आदिम राक्षसों से लड़ाई के अनगिनत दृश्य धुँध की लकीरों की तरह तेज़ी से उभरे और ग़ायब हो गए। ये अभ्यास के दृश्य ऐसे चमके जैसे जीवन भर साथ रहे हों।

शरीर की गहराइयों से गर्म ऊर्जा फूटी, छोटी मछलियों के झुंड की तरह सरसरा कर माँसपेशियों में दौड़ गई।

«यह… इतनी ताक़तवर हथेली-कला?!»

सिर्फ़ बावर्ची मॉडल वाले इस आदमी ने हब-टाउन में दाख़िले की भीख माँगने के लिए काफ़ी Chronos कर्ज़ लिया था। उसने कभी सोचा न था कि एक बावर्ची हो कर, एक दिन ऐसी ताक़तवर हथेली-कला सीखेगा।

अब मैं… वह आदमी नहीं रहा जो बस खाना बना सकता था, अब मेरी ज़िंदगी में भी, और विकल्प होंगे!

……

उसके पास के कुछ लोग हाथ के गुप्त कौशल को सहला रहे थे।

उनमें से कई की छाती के मॉडल लगातार चमक रहे थे, ज़ाहिर है कोई उनसे संपर्क कर के ख़रीदना चाह रहा था।

कुछ लोगों के चेहरे पर संघर्ष था, और कुछ ने जल्दी सोच-विचार कर फ़ौरन इस्तेमाल कर लिया; कुछ जान-पहचान वाले सिर झुका कर इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि एक-दूसरे से अदला-बदली करें, अपने लिए ज़्यादा मुनासिब गुप्त कौशल चुनें।

«हमारी बारी, कप्तान।»

रोशनी के काग़ज़ श्याओ यूशान के पास उत्साहित कुछ लोगों तक पहुँचे।

«यह तलवार-कला मुझे चाहिए थी, सचमुच मुझे दे दी?»

लाल बालों वाले नौजवान ने हाथ की ज्वाला तलवार को देखा, फिर सिर उठा कर अपनी तरफ़ हल्का सिर हिलाते मो ली को देखा।

वह थोड़ा झेंप कर सिर झुकाया : «माफ़ कीजिए, एलेक्ज़ेंडर, पहले के लिए बहुत अफ़सोस है।»

«कोई बात नहीं, तुम डच हो न, हम भी पड़ोसी ही हुए।»

बग़ल में काँटों पर बैठे श्याओ यूशान ने सिर उठा कर कहा : «माफ़ करना, पहले… यह मेरी अकेले की ग़लती थी।»

«कोई बात नहीं, सब पुराने साथी हैं। अब मुझमें ताक़त है, सबकी ताक़त बढ़ाना भी स्वाभाविक है।»

मो ली ने श्याओ यूशान के सामने सफ़ेद चीनी मिट्टी की प्लेट के पास अनुबंध-पत्र रखा, फिर दूसरी तरफ़ चला गया।

हल्की रोशनी से चमकते अनुबंध-पत्र को देख कर श्याओ यूशान के दिल में मिली-जुली भावनाएँ उठीं।

……

«सवाल है।» दूर से एक आवाज़ उठी : «ज़िज़ांग महादेव, यह अनुबंध-पत्र शायद किसी मॉडल की क्षमता होगी, क्या शाब्दिक अर्थ ही है?»

«इतने सारे अनुबंध-पत्र, शायद शाब्दिक अर्थ नहीं है, किसी में इतनी ऊर्जा नहीं कि इतने सारे के लिए काम करे, सिवाय इसके कि ग्रिड एक साथ कई किताबें पैदा कर सके। लेकिन ज़ाहिर है हर एक अलग है।»

यांग ज़िज़ांग ने बोबोली की तरफ़ देखा : «अनुबंध-पत्र हमारी टीम के इस सदस्य की क्षमता है। वह तुम्हारे लिए बहुत सी चीज़ें सीख सकता है।»

सब हैरत से बोबोली को देखने लगे, तब समझ आया कि यह लड़का यांग ज़िज़ांग के साथ क्यों जुड़ा हुआ है।

«अरे बाप रे, ऐसा बैल-घोड़ा मॉडल भी होता है?»

यांग ज़िज़ांग बैठ गया, कानों में बातचीत और हँसी की आवाज़ें धुँधली होती गईं…

«…बोबोली साहब से पूछना है, क्या बता सकते हैं कि आप लोगों ने थोड़े समय में दशकों या सैकड़ों सालों का अभ्यास कैसे पूरा किया?»

ऐसा कैसे पूछ सकते हैं, यांग ज़िज़ांग ने सोचा, हालाँकि कोई बात नहीं, आख़िर डाक चिह्न दुनिया इच्छा ताबीज़ से भी दुर्लभ है…

«यह, तो ज़िज़ांग साहब के पूर्ण डाक चिह्न की बदौलत है।»

«हैं?» ये लोग एक साथ ठिठक कर यांग ज़िज़ांग को देखने लगे।

मो ली को बिना कुछ छुपाए यह बताते सुनना कि इच्छा ताबीज़ के ज़रिए डाक चिह्न दुनिया में दाख़िल हो कर ख़ुद से संपर्क किया — यांग ज़िज़ांग के दिल में अतीत की यादों की हँसी और चिंता दोनों उठीं।

माहौल चाहे कितना भी गर्म क्यों न हो, मो ली ने भविष्य बदल दिया था।

और वह भी अपना भविष्य…

«कोई अचरज नहीं कि तुम तीन लोग ख़ुद को ‘ग्रुप’ कहते हो, सचमुच एक-दूसरे के बिना अधूरे हो।»

«अब समझ आया!»

«आह, पूर्ण डाक चिह्न दुनिया, यह सचमुच नक़ल करना मुश्किल है। एलेक्ज़ेंडर साहब ने जो मात्रा निकाली उससे मैं लगभग धोखा खा गया था, अनुबंध-पत्र मेरे अंदाज़े से दस हज़ार गुना भी ज़्यादा क़ीमती है।»

«हाँ,» यांग ज़िज़ांग विज्ञापन देना नहीं भूला, «भविष्य में अगर किसी को पूर्ण डाक चिह्न मिले, तो हमारे बोबोली साहब को याद करना।»

{लगता है, तुम लोग इन अनुबंध-पत्रों से काफ़ी संतुष्ट हो।}

«कौन?» सब एक झटके से चौंक गए।

यह भारी-भरकम परिचित मानसिक आवाज़ ने यांग ज़िज़ांग की आँखों को अचानक चमका दिया।

धम! पत्थर उखड़ कर नीचे गिरे।

भवन के अंदर और बाहर के लोगों ने एक साथ सिर उठाया, यहाँ की गुंबदनुमा छत में अचानक दरारें पड़ गईं, अनगिनत पट्टियाँ ज़हरीले साँपों की तरह घुस आईं और पल भर में नीचे के कुछ लोगों को लपेट लिया।

«आह!»

कुछ लोग चिल्ला भी नहीं पाए थे कि ऊपर खींच लिए गए, और दो लोग तो वहीं मुरझा कर सूखे ढाँचे बन गए।

दो लंबी पतली पट्टियाँ लंबी मेज़ के इस छोर की तरफ़ लपकीं।

«सावधान!» यांग ज़िज़ांग ने बग़ल में झुक कर थोड़ी घबराई शू ऐयुआन को बाँहों में भर लिया।

कोमलता और ख़ुशबू नाक में भर गई, सर्र से, रस्सी जैसी पट्टियाँ फ़ौलादी भाले की तरह दसियों मीटर ऊँची गुंबदनुमा छत को भेद कर धम से मेज़ को तोड़ गईं।

«वहाँ ऊपर कौन है!»

भवन के अंदर के लोग पल भर में अफ़रा-तफ़री में पड़ गए, दुश्मन से निपटने की तरह टूटी छत के बाहर की शक्ल पर चिल्लाने लगे।

{तुम लोग मुझे, पट्टी डॉक्टर कह सकते हो।}