ज़मीन गरज रही थी, बिजली की नसों-सी, पहाड़ ढह रहे थे, हज़ारों शेडों से लाल धुआँ उठ रहा था।
समय की सुई मानो प्रलय पर पहुँच गई हो।
दहशतज़दा लोग घबराकर अँधेरे आसमान में सरकती अनगिनत रोशनी की लकीरों को देख रहे थे।
«कौन है महा-सितारा?»
«ज़ाहिर है सबसे ज़्यादा मशहूरियत वाला!»
«और कौन हो सकता है, आज रात पूरे आवृत्ति हानि क्षेत्र को चमकाने वाला मर्द कौन होगा! ज़रूर वही है…»
दोनों केंद्रीय क़स्बों ने सर्चलाइट-जैसे प्रकाश-चक्र आसमान की ओर छोड़े।
तेज़ दौड़ती ट्रेन ने दो निगाहों को अपनी ओर देखते महसूस किया।
[मुझे कौन घूर रहा है।]
{पिछले तीन सालों के प्रभाव मूल्यांकन के आधार पर, तुम्हें, बिना किसी मशहूरियत टीम पैकेजिंग के, दो केंद्रीय क़स्बों को चमकाने वाले सुपर-सितारे के रूप में प्रमाणित किया गया है!}
[क्या?]
बेहद तेज़ दौड़ती और लोगों को बचाती ट्रेन थोड़ी उलझन में थी।
{तुम आज रात की सबसे चमकीली मौजूदगी हो।}
{तुम्हें महा-सितारा प्रमाणित किया गया है!}
{तुम्हें स्वर्ग जाने का अधिकार मिल गया है!}
सन्-सन्, शूँ-शूँ!
संवाददाताओं की रिकॉर्ड-पुस्तिकाएँ झुंड के झुंड मृगतृष्णा-ट्रेन की ओर उड़ आईं।
[मुझे महा-सितारा प्रमाणित किया गया है!]
ट्रेन को सर्वोच्च सम्मान मिला।
«अरे?»
यांग ज़िज़ांग और बाक़ी लोग स्तब्ध होकर अनगिनत उड़ते बर्फ़ के टुकड़ों-जैसे छोटे काग़ज़ों को देख रहे थे। काग़ज़ कम, बर्फ़ की छोटी फुहार ज़्यादा — या रूसी के टुकड़े।
महीन-महीन रोशनी की किरणें बिखरे-टूटे अँधेरे आसमान को चीरकर धुँधली सफ़ेद रोशनी के स्तंभ गिरा रही थीं, मानो दिन आधी रात का दरवाज़ा तोड़कर सीधे प्रकट हो रहा हो!
{मैं मा चाओ महा-सितारा हूँ?}
«वक़्त नहीं, जल्दी जाओ! छोटे मा चाओ!»
भूतिया छायाओं वाली ट्रेन रोशनी की लकीर लिए धड़ाम से टूटते-बिखरते प्रकाश-धब्बों वाले आसमान से टकराई।
कई डिब्बों में हज़ार से ऊपर लोग भरे थे — पहली बार यह मेट्रो खचाखच इंसानों से भरी थी, और पहली बार हज़ारों मीटर ऊँचे आसमान में उड़ी थी।
«उड़, उड़ गई।»
ट्रेन में एक के ऊपर एक सिमटे अनगिनत लोगों ने गर्दन निकालकर भूतिया-सी अर्ध-पारदर्शी बॉडी के बाहर देखा। बिखरी-टूटी ज़मीन पर हर जगह गहरे लाल ज़ख़्म थे, कुछ जगहों पर तो लावा उबल रहा था।
लेकिन अगले ही पल, पीली रेत उड़ी और जर्जर कंकाल-सेना ट्रेन पर काटने-मारने टूट पड़ी।
ट्रेन के अंदर के छोटे काग़ज़ों से फैलती ऊर्जा फूटी और एक टेढ़ी-मेढ़ी ऊर्जा-वायुमार्ग बना दिया — वह उलटे आसमान में फैला था, बिल्कुल भूलभुलैया की तरह।
छाया-ट्रेन रोशनी की तरह उसमें दौड़ गई।
आसमान में, मुख्य संपादक की आँखों से चमकीली आभा चमक रही थी, मानो अदृश्य तलवार-चाकू हवा में उस इधर-उधर लगातार बचती कंकाल-आकृति पर वार कर रहे हों। उसने सिर घुमाकर दूर देखा — एक मृगतृष्णा-ट्रेन तेज़ी से आ रही थी।
{मरने आए हो!}
उसने ऊँची आवाज़ में ललकारा।
और कंकाल-सेना प्रकट हुई और आसमानी भूलभुलैया-मार्ग पर वार करने लगी।
लेकिन यह मार्ग कई बार लड़खड़ाकर गिरने को हुआ, फिर भी आख़िरकार टिका रहा।
चीख़~!
ट्रेन सन् से पास आई। ट्रेन की खिड़कियों में सबके चेहरे पर हैरत थी — मानो देवताओं की लड़ाई क़रीब से निहारने वाला पर्यटक दल हो।
सन्! अनगिनत तारा-बिंदु डिब्बे को पार कर मुख्य संपादक के पास पहुँच गए — वे छोटे काग़ज़ थे।
उन्होंने साथ लाई विशाल अज्ञात ऊर्जा को एकत्र कर लिया।
मुख्य संपादक ने जब उन्हें देखा और पल भर को ठिठकी, तभी अचानक उसके पीछे एक और शिंग म्याओ की आकृति प्रकट हुई।
«मेरा नाम जुलाई.शिंग म्याओ है, तुम्हारा नाम मेंग रुई.हाओ शा है।»
शिंग म्याओ ने उसके कान में कहा।
«छोटी रुई-रुई, एक बची हुई आत्मा के रूप में, तुमने बहुत अच्छा किया है।»
उस औरत का शरीर अवशेष-छाया खींचता घूमा और पीठ सीधे सामने बन गई — उसने इस प्रतिलिपि-शरीर का सामना किया।
उसकी छाती पर पंचकोणीय Moxel चमका, और एक हथेली चलाई, जिसमें सब कुछ चीरने की आभा थी।
शिंग म्याओ ने हल्की आह भरी।
इस जर्जर आकृति के उसके हाथों फूटने से पहले, शिंग म्याओ की एक हथेली ने उसके शरीर को भेद दिया — लेकिन ख़ुद भी पल भर में नष्ट हो गया।
अगले ही पल, बाहर निकली मुख्य संपादक के पीछे फिर प्रतिलिपि का जर्जर कंकाल-शरीर प्रकट हुआ।
{लगातार प्रतिलिपि बनाना — यही है मेरा कभी का चमकीला दर्पण रक्तवंश?}
शिंग म्याओ ने उसे कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि नर्मी से कहा:
«इतने साल अकेले बच्चे की तरह फिर से बड़ी हुई, सफ़र बहुत थका देने वाला रहा होगा। कोई बात नहीं, अब तुम चैन से जा सकती हो।»
मृगतृष्णा-ट्रेन पल भर में ग़ायब हो गई — उसने आधा मिलीसेकंड भी रुकने की हिम्मत नहीं की। ज्योंही वे छोटे काग़ज़ बाहर निकले, ट्रेन सीधे मानसिक बल अवस्था में डूब गई और «बो बो ली स्टेशन» की ओर बेहद तेज़ी से दौड़ गई।
शिंग म्याओ के सिर के पास, असंख्य धुँधली मृगतृष्णाएँ प्रकट हुईं — सब स्वप्न-बुलबुलों-जैसे परलोकीय दृश्य थे।
उसी समय, बर्फ़ के टुकड़ों-जैसे काग़ज़ आपस में गुँथकर एक सिल्वर-व्हाइट प्रकाश-चक्र बन गए और उस औरत के सिर के ऊपर तैरने लगे।
प्रकाश-चक्र से विशाल भव्यता उठी।
{यह क्या है!}
चितकबरे बादलों के नीचे, उस औरत ने थोड़ी घबराहट से सिर के ऊपर देखते हुए कहा।
अनगिनत धीमी फुसफुसाहटें और दृश्य मुख्य संपादक के मस्तिष्क में प्रकट होने लगे।
«यह है हमारा बीता हुआ कल।»
उसकी स्मृति और विचार अस्त-व्यस्त हो गए — जैसे अचानक असंख्य वर्षों की, पूरी तरह अज्ञात स्मृतियाँ जाग उठीं, जिसने तन-मन पर ज़बरदस्त आघात किया।
जर्जर कंकाल ने हल्के से ज़ख़्मी औरत को गोद में लिया।
«कोई बात नहीं, तुम बस भूल गईं। भूल गईं कि ज़मीन का रूप लेना तुम्हारा अपना फ़ैसला था! अब, सब याद कर लो!»
{नहीं, यह नहीं है।}
बग़ल की हवा में अचानक धड़ाम से भारी आवाज़ हुई।
पहाड़-सी काया आ पहुँची — उसके नितंबों के नीचे एक ऐसी काली सेडान थी जो दबकर लगभग दिखती न थी। वह ईथर अंतरिक्ष को तोड़ती ऊँचाई पर प्रकट हुई और मेहराब खींचती आई।
«मुख्य संपादक महोदया! जल्दी चढ़ें!»
उस औरत की भ्रमित निगाहें अचानक स्पष्ट हो गईं। उसने ज़ोर से सिर झटका और आँखों से भयानक तरंगें बग़ल वाले पर बरसा दीं।
{हाँ, मैं अब वह नहीं हूँ! इसलिए ये स्मृतियाँ मेरी नहीं, दूर हो!}
यह वाक्य कहते ही, देवदूत प्रकाश-चक्र-जैसा प्रकाश-घेरा ख़ामोशी से टूट गया।
काग़ज़ पल भर में इकट्ठा होकर एक हेलमेट-जैसी सफ़ेद टोपी बन गई और उस औरत का सिर ढाँक लिया।
उस पर हर तरफ़ खाइयाँ-नालियाँ थीं। नीचे की ज़मीन पर, हज़ारों धुँधली विस्मरण-नदियाँ आसमान की धारियों के मार्गों से दूर-दूर तक गूँजती हुईं, एक साथ सफ़ेद हो गईं और आसमान-ज़मीन को जोड़ती रोशनी बिखेर दीं!
आसमान और ज़मीन मानो शोक में डूबे हों।
धुँधले इतिहास की मृगतृष्णाएँ आसमान पर छा गईं — सब उसके अतीत का प्रदर्शन थीं।
{आह!}
आसमान में उलटी बिखरी रोशनियाँ गुँथी ज़ंजीरों की तरह थीं, और पूर्ण मानसिक बल रूप में बदली उस औरत को जकड़ लिया।
वह तेज़ी से छूटने की कोशिश कर रही थी और मानसिक बल की मृगतृष्णाओं से रोशनी पर हमला कर रही थी।
शिंग म्याओ यकायक टकराने आ रहे शान लीशी के पीछे प्रकट हुआ। उसके सिर ने हल्के से झुककर, शान लीशी की भारी-भरकम काया और उसके नितंबों के नीचे की सेडान को पल भर में उड़ा दिया।
«शरीर को नई दुनिया की ज़मीन बनाना, उसका अपना फ़ैसला था। मैं बस उसके आदेश का पालन कर रहा हूँ। और आख़िरी आदेश है — उसके अतीत के मोह से उपजी बची-खुची आत्मा के शरीर का विनाश।»
{नहीं! शिंग म्याओ, क्या तुम्हें सचमुच पुराना रिश्ता याद नहीं!}
«अफ़सोस, तुम वह नहीं हो। भोली रुई-रुई मानती थी कि दुनिया का एक सुंदर भविष्य होगा — मैं उसका छोड़ा हुआ, अतीत को काटने वाला शस्त्र हूँ।»
जर्जर कंकाल ने संहारक ऊर्जा लिए उस बर्फ़-सफ़ेद आकृति पर हमला किया जो अतीत की स्मृति-किरणों से बँधी थी।
तेज़ रफ़्तार आवाजाही में, कई और हड्डियों के टुकड़े पल-भर में हज़ारों ली की दूरी चीरकर उड़ आए और उसके शरीर के पीछे कसकर लग गए — तारों की चमक की अवशेष-छायाएँ छोड़ते।
धड़ाम!
भारी संख्या में मानसिक बल मृगतृष्णाओं ने किरणों पर काटकर, आख़िरकार उन्हें तोड़ दिया।
बेहद तेज़ी से पीछे हटती औरत की निर्मम आँखों में, तारा-तरंगें तेज़ी से चमकती हुई आईं।
{मैं सब संवाददाताओं की मुख्य संपादक हूँ, मैं इस ज़मीन की असली मालिक हूँ! मैं नई गाथा रचूँगी!}
«नई दुनिया के सब लोग, उनके मुख्य संपादक हैं — बस तुम और मैं नहीं।»
दोनों एक के बाद एक तेज़ी से हवा में चले — दो धूमकेतु-ज्वालाओं की तरह।
पट-पट! शिंग म्याओ का शरीर जलने लगा और उसमें से अलौकिक आभासी ज्वाला उठने लगी।
{तुम क्या करने वाले हो!}
«नए भविष्य को हमारी ज़रूरत नहीं, यह मोह ख़त्म होना चाहिए।»
शिंग म्याओ की रफ़्तार अचानक विस्फोट-सी बढ़ गई — काली और सफ़ेद दो आकृतियाँ एक साथ आ मिलीं।
आसमान में चमकीली श्वेत रोशनी फूट पड़ी।
तूफ़ानी आँधी वहाँ से उठी और पूरे आवृत्ति हानि क्षेत्र में फैल गई। उलटे-पलटे गए लोग ज़मीन पर दबे-दबे मुश्किल से सिर उठाकर ऊपर देख रहे थे।
ऊँचे आसमान में, अनगिनत टुकड़े उल्काओं की तरह ज़मीन के हर कोने में फटकर गिरे।
एक फटा कपड़ा हवा में तेज़ी से घूमता आँधी के साथ दूर उड़ गया।
प्रकाश-गोलों में बैठी परियाँ घबराई हुई सब देख रही थीं।
उन्हें अचानक बहुत दुख हुआ — समझ नहीं आ रहा था कि आख़िर क्यों, जैसे कोई बहुत अपना छूट गया हो।
वे तो उस अजीब आदमी को जानती तक नहीं थीं।
एक-एक करके लोहे-पत्थर-जैसे धुँधले हड्डियों के टुकड़े, सफ़ेद सुंदर धारियाँ लिए, उल्काओं-से ज़मीन के हर कोने में गिरे।
उनके गिरते ही, विस्मरण-नदियाँ फिर काली पड़ने लगीं। उनसे जुड़े केंद्रीय क़स्बों की ऊर्जा-शिराएँ भी सिकुड़ने लगीं और हर जगह की दहलाने वाली दरारें तेज़ी से भरने लगीं।
आसमान की सब आकृतियाँ ग़ायब हो गईं। आसमान में फूटे बादलों के ऊपर से रेशम-रेशम धूप गिरी और फिर तुरंत घने बादलों से ढँक गई।
दिन निकल आया।
साँय्-साँय्~
साँय्~
धीरे-धीरे शांत होती हवा वीरान, ऊबड़-खाबड़ ज़मीन पर बह रही थी।
आसमान की ओर देखती वह दो चोटियों वाली युवती से ताक़त जाती रही और वह धम्म से घुटनों के बल ज़मीन पर गिर पड़ी। बहुत देर बाद, युवती ने आस्तीन से आँसू पोंछे, बग़ल का रूबिक क्यूब उठाया, और गाड़ियों की लीक के साथ, अकेली क़दम-दर-क़दम दूर क्षितिज के छोर की ओर चल पड़ी।
«आत्मा-जुड़वाँ वीर यात्रा, पूर्वार्ध — ज़मीन का तारा» समाप्त