अध्याय 153 — दिन और रात की बातचीत

दिन और रात की जंग -1

धड़ाम!

सारे डिब्बे पल भर में शान लीशी की हथेली से निकली ज़बरदस्त ताक़त से चिथड़े-चिथड़े हो गए और आसमान में मानसिक ऊर्जा के टुकड़ों में बदलकर बिखर गए।

लेकिन हम सबको रत्ती भर चोट नहीं आई।

यांग ज़िज़ांग खिड़की की ओर लपका और हैरत से देखा कि एक और ट्रेन के टुकड़े नीचे के आसमान से फूटते और गिरते हुए दिखे।

«रक्तवंश चक्र… जुड़वां?»

उसने तो एक चक्र वाला रक्तवंश तक नहीं देखा था, पाँचवें चक्र की तो बात ही छोड़ो। यह ऐसी जानकारी थी जो उसने कभी सुनी नहीं थी।

और इसी पल, जिस असली ट्रेन में वह था, वह पहले ही दस ली से ऊपर की ऊँचाई पर पहुँच चुकी थी और तेज़ी से झुककर नीचे आ रही थी।

अभी-अभी टूटा हुआ डिब्बा, ज़ुओ फ़ेइश्यान ने अचानक रचा हुआ प्रतिलिपि-शरीर था।

«तुम ठीक हो?»

यांग ज़िज़ांग ने एकदम से हड्डियों का ढाँचा बन चुके ज़ुओ फ़ेइश्यान की ओर देखा।

चिन मेंग के मामले से देखें तो, साधारण मानव शरीर से ऐसी क्षमता का उपयोग बहुत बड़ा बोझ है। और वह तो चिन मेंग से भी ज़्यादा गंभीर लग रहा था।

ज़ुओ फ़ेइश्यान ने ज़बरदस्ती मुस्कराकर पत्थर पर टेक लगाई:

«मेरी… हालत थोड़ी ख़राब है, अच्छा खाना खाकर ही ठीक हो पाऊँगा।»

श्याओ लियू ने उसे सहारा देकर, हड्डियाँ निकली उसकी छाती पर हाथ फेरते हुए कहा: «ठीक-ठीक, लौटकर मैं तुम्हारे लिए अच्छा खाना बनाऊँगा, ब्रेज़्ड पसलियाँ कैसी रहेंगी।»

«मुझे… दो बार खाना है।»

«हाँ-हाँ, दो प्लेट ही सही।»

ज़ुओ फ़ेइश्यान ने होंठ हिलाए, उसकी आँखें धीरे-धीरे बंद हो गईं, और छाती धौंकनी की तरह चलते हुए बोला:

«लौट चलो, शिंग म्याओ महादेव ने कहा… संख्या लगभग पूरी हो गई… उधर हमारे और दिव्य पत्थर हैं।»

«ठीक!»

बस स्टेशनों के बीच की यात्रा में जाने से रफ़्तार की तुलना ही नहीं हो सकती थी।

[मैं आधी रात ट्रेन चालू करने के लिए 1N मूलधन ख़र्च करूँगा।]

[आधी रात ट्रेन, अगला स्टेशन वांग चोंग स्टेशन।]

डिब्बा मानसिक-क्षेत्र यात्रा शुरू करने वाला था।

धड़ाम! डिब्बा अचानक फिर उलट गया — वह विशाल क़ालीन पहले ही ढाँकने आ पहुँचा था। उस पर बैठे तगड़े आदमी की आँखों में प्रकाश-घेरे उभरे, मोटी उँगलियों के सिरे पर धूल जमा होकर चक्की के पाट जितना बड़ा नुकीला शंकु बन गया।

इस अनिवार्य हमले का सामना करते हुए, डिब्बे में सबके चेहरों पर दहशत और निराशा उभर आई।

{आह।}

एक हल्की-सी आह।

यह आह चारों ओर दसियों ली तक गूँज गई।

डिब्बे के सारे दिव्य पत्थर एक साथ चमके, और ऊँचाई पर मौजूद शान लीशी का चेहरा बदल गया।

सन्! न जाने कितने लाख Chronos वाला नुकीला शंकु आया, जबकि क़ालीन पाल की तरह खड़ा हुआ और अर्ध-चाप बनाकर हवा में मुड़ा, फिर बेहद तेज़ी से भाग खड़ा हुआ।

यांग ज़िज़ांग को अचानक महसूस हुआ कि एक सख़्त जेड-पत्थर-जैसी कंकालीय हथेली शून्य दशमलव शून्य-शून्य-शून्य मिलीसेकंड में धीरे से उसके कंधे पर आई और अनगिनत अवर्णनीय ऊर्जा पल भर में शरीर में घुस गई।

{मैं तुम्हारे साथ अस्थायी नियंत्रण अनुबंध करना चाहता हूँ।}

[शिंग म्याओ मेरे साथ अस्थायी नियंत्रण अनुबंध करना चाहता है।]

{परदेशी नायक, कृपया स्वीकार करें।}

[मैंने अनुबंध स्वीकार कर लिया, अवधि 100S।]

यांग ज़िज़ांग ने अनायास बाँह उठाई और पहले के ज़ुओ फ़ेइश्यान की तरह दूर की ओर इशारा किया।

यह सीधी तनी बाँह, हवा में ज़बरदस्त उथल-पुथल मचाती ट्रेन भी ज़रा-सा नहीं डिगा पाई।

चाहे कितना ही उलटे-पलटे, उसकी उँगली ने दूर की उस आकृति को मज़बूती से लक्ष्य किए रखा।

[मैंने शिंग म्याओ की तारा-ऊर्जा अभिकर्ता प्राप्त की।]

[मैंने शिंग म्याओ का Chronos शून्य अतिरिक्त निवेश प्राप्त किया।]

[मैंने शिंग म्याओ का पद-स्तर अस्थायी उधार अधिकार प्राप्त किया।]

[मैंने रक्तवंश की मुक्ति महसूस की।]

[मैंने चमकीला क्षेत्र रक्तवंश का अस्थायी उधार उपयोग-अधिकार प्राप्त किया।]

मानसिक संवेदन में, यह सब पल भर में पूरा हो गया।

[अतिरिक्त पद-स्तर प्रदर्शित, करोड़-अंक, पद-स्तर दमन सफल।]

[प्रक्षेप पथ समायोजन।]

गूँज~

तेज़ी से आता लाल ज्वाला-पत्थर का नुकीला शंकु हल्का-सा घूमकर ज़मीन पर जा टकराया।

[पद-स्तर प्रदर्शित, इकाई-अंक।]

[अतिरिक्त पद-स्तर दमन, करोड़-अंक, पद-स्तर दमन सफल।]

धड़ाम!

ज़मीन काँप उठी — वहाँ मानो पहाड़ टूटकर ज़मीन फट गई हो, एक विशाल दरार-गड्ढा बन गया, अनगिनत टुकड़े चमकते हुए आसमान की ओर उछले।

दूर तेज़ी से जा रहा क़ालीन अचानक घूमा और वापस आ गया।

सन्~ अँधेरे आकाश के शिखर पर, दूर से अनगिनत गहरी सुनहरी लहरें फैल गईं। मानो किसी ने आकाश में पत्थर फेंका हो, अँधेरे बादलों की सुनहरी लहरें जगा दीं — आसमान छाती, न जाने कितने लाख ली।

इस विशाल भव्यता में, बर्फ़-सी साफ़ स्त्री-आवाज़ आई।

{तुमने मेरी एक उँगली तोड़ दी, शिंग म्याओ, क्या तुम सचमुच ऐसा करना चाहते हो!}

ज़मीन पर, सब लोगों ने सिर उठाकर देखा — उन सबने यह देवताओं-जैसी मानसिक आवाज़ सुनी।

ट्रेन की ओर आते क़ालीन पर, शान लीशी ने दाँत पीसे और क़ालीन से छलाँग लगाकर नीचे कूद गया — धड़ाम से ज़मीन में जा घुसा।

क़ालीन तेज़ आँधी में उड़ते बड़े कपड़े की तरह उलट-पलट गिरती ट्रेन से टकराया और खड़खड़ाता हुआ लिपट गया।

उसकी बची हुई तैरने की क्षमता ने ट्रेन के पूरे गिराव को धीमा कर दिया।

आकाश की तरंगें चमकते हुए बिखर गईं।

«यह आवाज़, यही है मुख्य संपादक?»

यांग ज़िज़ांग ने मुश्किल से अपनी भावनाएँ क़ाबू में रखीं — साक्षात् दबाव अभी तक उस पर छाया हुआ था।

{हाँ, यही है।}

दिव्य पत्थर से निकली आवाज़ डिब्बे में गूँजी।

{यह उड़न-क़ालीन तुम लोगों के लिए मेरा धन्यवाद-उपहार समझो। आख़िर यह ट्रेन भविष्य में शायद ज़िंदा इंसानों के बैठने लायक़ नहीं रहेगी।}

टूटे-फूटे जेड-कंकाल शरीर ने मुड़कर, अपनी बची इकलौती बाईं बाँह उठाई — और क़ालीन तुरंत डिब्बे में आकर अपने आप उसके शरीर पर परत-दर-परत लिपट गया।

लाल, सफ़ेद, गहरी सुनहरी रोशनियाँ जादुई धारियाँ बनकर चमकीं और ग़ायब हो गईं। बड़ा क़ालीन हल्की शिफ़ॉन-सा बनकर डिब्बे में गिर पड़ा।

«यूँ ही, उस आदमी का ख़ज़ाने पर नियंत्रण ख़त्म कर दिया?»

ज़ुओ फ़ेइश्यान बेहद हैरान था — उसकी जानकारी में, ऐसे मॉड्यूल पर एक बार क़ब्ज़ा हो जाए तो, जब तक सक्रिय रूप से Chronos ख़र्च करके न छोड़ा जाए, केवल इंसान के मरने पर ही इसका मालिकाना बदल सकता है।

सचमुच ऐसे ताक़तवर अस्तित्व की बात ही कुछ और है। उसे तो पता भी नहीं था कि विरोधी कितने भुजाओं वाला Moxel है — क्या किवदंती वाला पंचभुज, या षष्ठभुज भी?

जर्जर कंकाल-मानव ने हल्की शिफ़ॉन उठाई और धीरे से बोला:

{यह मेरे स्वामी का कभी का दुपट्टा था, इसलिए मैं हटा सका।}

यांग ज़िज़ांग ने बस एक नज़र डाली। अभी ऐसी बातों का वक़्त नहीं था।

«मा चाओ, तुम ठीक हो?»

उसने एक सिक्का ख़र्च करके ट्रेन के लिए Chronos भरपाई कर दी थी।

{मैं, छोटा हो गया हूँ, और बहुत कमज़ोर भी।}

«थोड़ी देर और सह लो, जब तक मेरे पास वक़्त है, अभी-अभी का वह दिव्य पत्थर वापस ले आएँ। शायद और हिस्सों के दिव्य पत्थर भी मिल जाएँ।»

{ओह…}

इस वक़्त ट्रेन अपने भीतर की उस रहस्यमयी आभा को महसूस कर रही थी। हालाँकि बड़ी चोट लगी थी, लेकिन उसने ऊँचे स्तर की शक्ति का अनुभव भी कर लिया था, जो उसके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद था।

इंसानों को ढो पाना या न ढो पाना, कभी उसकी चिंता का विषय नहीं रहा।

ट्रेन ने बिना कुछ कहे रुख़ बदला और अभी-अभी छोड़े शेड क्षेत्र की ओर यात्रा कर गई।

अपने अंदर इस कंकाल के साथ, वह तेज़ी से उस काफ़िले के पीछे जा पहुँची जो पहले ही भागना शुरू कर चुका था।

आकाश की तरंगें फिर चमकीं, इस बार उस स्त्री-आवाज़ में कोई शब्द न थे, लेकिन अनगिनत ऊर्जा-तरंगें समुद्र की लहरों की तरह पूर्व की ओर उमड़ीं — वहाँ क्षितिज पर हल्की रोशनी की एक झलक दिखी।

{अब बुरा हुआ।}

धड़ाम…

ट्रेन तुरंत ठोस रूप लेकर वीराने में जा गिरी, मानो पटरी से उतर गई हो — लंबा धूल-धुआँ उठाती, ज़मीन पर लगभग सौ मीटर लंबा निशान छोड़ती, कानफाड़ू गर्जना करती।

डिब्बे में तैरता शिंग म्याओ तुरंत बाँह उठाकर, पत्थर और धूल से बने अपने आभासी सिर की ओर इशारा किया — उसकी खोपड़ी के हिस्से में पहले से एक हड्डी का टुकड़ा तैर रहा था।

उसके कनपटी की ओर इशारे के साथ, पूर्व में अभी-अभी उभरी रोशनी फिर धुँधली पड़ गई।

दुनिया फिर आधी रात में लौट आई।

ज़मीन के हर कोने में लोग हाहाकार कर उठे।

वे कैसे न देख पाते कि अभी-अभी वह देवताओं-जैसी, पूरे आवृत्ति हानि क्षेत्र में फैलती स्त्री-आवाज़ किसी और शक्ति से होड़ कर रही थी — वे आकाश के दिन-रात के प्रकटन पर अधिकार जमाने की जंग लड़ रहे थे।

«शिंग म्याओ ने ही ज़रूर दिन को रात में बदला है!»

आकाश को ढाँकने वाली तरंगों से फैली प्रश्न-भरी आवाज़ ने शिंग म्याओ का नाम तो पहले ही ज़मीन के हर जीव के मन में अंकित कर दिया था।

अब वे सब बातें कर रहे थे — वह तथाकथित शिंग म्याओ आख़िर है कौन, और बड़े ज्या पक्ष माल-दल ने कैसे उस ज़बरदस्त अस्तित्व को पा लिया, जिसने इतने भयानक विरोधी को खींच लाया।

«क्या बड़ा ज्या पक्ष माल-दल जानता है शिंग म्याओ कौन है।»

«ज़रूर! वह आदमी पक्का शिंग म्याओ का काम कर रहा है!»

«हे भगवान, यह तो देवताओं के बीच की लड़ाई है।»

दिव्य पत्थरों पर क़ब्ज़ा जमा रहे लोगों में से कम से कम आधे तुरंत खिसक गए।

जब शक्ति अपनी समझ के दायरे में हो, चाहे नई ही क्यों न हो, तब भी कोशिश करके छूने की सोच सकता है। लेकिन जब वह साफ़ तौर पर ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ दिखाए, तो ऐसी जंग हास्यास्पद लगती है।

बहुत से दिव्य पत्थर इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे लोगों ने बहुत साफ़-सुथरे ढंग से हार मान ली, कुछ ने तो सीधे जंगल में फेंक दिया — डर था कि कहीं उन दो अब तक अनदेखे रहस्यमयी अस्तित्वों से रत्ती भर भी वास्ता न पड़ जाए।

आलीशान काफ़िला वीराने में सरपट दौड़ रहा था, उनकी रफ़्तार ट्रेन और उड़न-क़ालीन से कहीं कम थी।

लेकिन जब भी मृगतृष्णा-ट्रेन उन्हें पकड़ने को होती, आकाश से सुबह-जैसी उषा-रोशनी उभर आती। मानो अँधेरे पर्दे का कोना उठ गया हो — और तेज़ दौड़ती ट्रेन तुरंत वीराने में जा गिरती।

«नहीं हो पा रहा, बार-बार पकड़ में नहीं आ रहे, अनुबंध का समय ख़त्म होने को है।»

शिंग म्याओ ने हल्की आह भरी:

{तुम ख़ुद जाओ!}

ज़मीन की हल्की शिफ़ॉन लहराई और ख़ुद-ब-ख़ुद आगे के यांग ज़िज़ांग पर लिपट गई।

उसने युवक को लपेटा और सीधे मृगतृष्णा को तोड़ता हुआ ट्रेन से बाहर निकाल दिया, फिर फड़फड़ाकर घूमती हुई एक घर जितने बड़े रंगीन ऊनी क़ालीन में फैल गई।

विशाल क़ालीन ने गिरते यांग ज़िज़ांग को थाम लिया और तेज़ी से क्षितिज पर स्थित काफ़िले की ओर दौड़ पड़ा।

आकाश की तरंगें फिर फैलकर चमकीं।

ऊँचे आसमान की तरंगों के केंद्र में, धुँधली सफ़ेदी की फैलती तरंगों के ठीक बीच, अँधेरे और सुनहरे दो रंगों के प्रकाश-घेरे काँपते हुए प्रकट हुए — मानो कई फैलते हुए प्रकाश-चक्र हों।

एक सुडौल आकृति वाली धुँधली सफ़ेद काया प्रकाश-चक्रों के ठीक बीच से धीरे-धीरे नीचे उतर रही थी।

उसने बाँह उठाकर इशारा किया:

{वापस लौट जाओ।}

अविचलित स्वर-लहर ने मानसिक जगत का तूफ़ान छेड़ दिया।

यांग ज़िज़ांग ने घबराकर चारों ओर देखा।

ज़मीन पल भर में भूत-क्षेत्र बन गई — अनगिनत रेत-धूल उड़ रही थी, जर्जर इंसानों और शहरों की आभासी छवियाँ थीं, हज़ारों टूटे-फूटे शरीरों वाले लोग हाथ-पाँव मारते हवा में उठकर घेरकर हमला करने आ रहे थे।

शिंग म्याओ जैसे उसके पास प्रकट हुआ — लगभग इसमें फँस चुका यांग ज़िज़ांग सचेत हुआ, यह सिर्फ़ मृगतृष्णा थी।

धड़ाम! वायु-तरंगें उठीं और कई सौ मीटर के दायरे की विचित्र छवियों को नष्ट कर दिया।

{पहले सामने वाली इस लेखनी को ख़त्म करते हैं।}

दूर की गाड़ी में, इस शैतानी-सी मानसिक आवाज़ को सुनकर, हू अधिकारी का छोटा मुँह बंद था। उसने सिर घुमाकर दूर तैरते काले बिंदु की ओर देखा।

देखा तो आसमान में लहराता क़ालीन रुकने और डोलने से अब तेज़ हो गया था।

उसने सिर घुमाकर ड्राइवर से कहा: «जल्दी, और तेज़।»

«हू अधिकारी, हम पर नज़र है, हम ईथर की दीवार तोड़कर उप-ईथर क्षेत्र में नहीं जा सकते।»

«तो शान लीशी की तरह, गाड़ियाँ छोड़ दो… जल्दी रुको, मुझे उतरना है!»

ज़बरदस्त दबाव पास आ गया।

ड्राइवर का चेहरा बदल गया: «नहीं, गाड़ी में इतने आत्मा अवशेष हैं, हरगिज़ उसके हाथ नहीं लगने दे सकते, वरना मुख्य संपादक महोदया…»

क़ालीन और पास आ गया।

«अब नहीं सोच सकती!»

हू अधिकारी के चेहरे पर घबराहट उभर आई।

युवती की नज़र उड़न-क़ालीन से पीछे की कई गाड़ियों पर गई।

«अलग-अलग भागो!»

उसने छोटे नुकीले दाँत भींचे और हाथ का गुप्त-ख़ज़ाना रूबिक क्यूब आसमान की ओर तान दिया।

धड़ाम!

उसकी आँखों से रोशनी फूटने से पहले, एक संहारक तरंग उमड़ आई — काफ़िला पल भर में धमाके में घिर गया, कई सुनहरी ज़ंजीरों में लिपटे दिव्य पत्थर ज़मीन पर बिखर गए।

रूबिक क्यूब की रोशनी चमकी और आती ऊर्जा को नष्ट कर दिया — युवती के मुँह से ताज़ा ख़ून निकल आया।

भूरे-पीले धुँधले वीराने में ज़बरदस्त गर्जना और धूल-धुएँ का बड़ा धमाका हुआ।

एक लड़खड़ाती रोशनी वाली काली भारी सेडान टेढ़ी-मेढ़ी चलती धुएँ से बाहर निकली और तेज़ी से आगे भागी — बाक़ी गाड़ियाँ पूरी तरह तबाह हो गईं।

उड़ता क़ालीन ज़मीन की ओर गिरा, ठीक ज़मीन पर गिरने से पहले वह अचानक धीमा हुआ और हल्के से ज़मीन पर आ लगा।

अनुबंध का समय ख़त्म हो गया।

यांग ज़िज़ांग ने महसूस किया कि उसके शरीर की ज़बरदस्त ताक़त खिंच ली गई है — शरीर ख़ालीपन से भर गया, लगभग गिर पड़ता। उसने ज़बरदस्ती रंगीन-काँच संवेदना चलाकर लालच से शून्य से शरीर सुधारने वाली किसी ऊर्जा को खींचा, दो गहरी साँसें लेकर तब जाकर आँखें खोल पाया — और आस-पास बिखरे उन ज़ंजीरों में लिपटे दिव्य पत्थरों को देखा।

दो छोटे प्रकाश-गोले नीचे उड़ आए।

{बदमाश यांग कमाल।}

{दोहरे सौ-अंक के बड़े शख़्स की शान ही कुछ और है!}

यांग ज़िज़ांग ने आकाश की ओर देखा — तरंगें ग़ायब हो चुकी थीं। अभी-अभी जो देखा था, वह सचमुच उतरी हुई मानसिक आकृति हो सकती थी, या सिर्फ़ अपने ख़िलाफ़ मानसिक हमला भी। अगर पहली बात सच थी, तो पता नहीं यह मुख्य संपादक की कई लेखनियों में से एक थी या नहीं।

जो भी हो, वह मृगतृष्णा शिंग म्याओ की शक्ति से विलीन हो चुकी थी।

वह बड़े क़ालीन से क़दम बढ़ाकर बाहर निकला।

यहाँ की सारी सेडान गाड़ियाँ तबाह होकर कूड़ा बन चुकी थीं, लेकिन दिव्य पत्थरों को ज़्यादा नुक़सान नहीं हुआ था।

«एक, दो, तीन… पाँच। उन्होंने पाँच दिव्य पत्थर इकट्ठा कर लिए थे! हफ़्फ़~»

ज़ंजीरों के लिपटे होने के कारण, बिना ज़्यादा मेहनत इन पत्थरों को पहचानकर इकट्ठा कर लिया।

यांग ज़िज़ांग के मन को बड़ी राहत मिली — इस एक झटके ने बहुत सारा वक़्त बचा लिया।

तभी पीछे से आती ट्रेन «लड़खड़ाती» हुई ज़मीन पर निशान छोड़ती आकर रुकी।

कुछ प्रकाश-गोले अधर में नीचे की ओर देख रहे थे।

केंद्रीय क़स्बे की स्क्रीन-दीवार में।

क़रीब एक-चौथाई स्क्रीनों पर ज़मीन पर लंबा निशान छोड़ती इस भूतिया ट्रेन का प्रसारण हो रहा था, मानो सड़क दुर्घटना का समाचार दृश्य हो।